नई दिल्ली: साल 2026 की शुरुआत में सोना और चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया था। जनवरी के आखिरी सप्ताह में दोनों कीमती धातुओं ने रिकॉर्ड ऊंचाई छू ली, लेकिन फरवरी आते-आते बाजार की दिशा बदल गई। तेज मुनाफावसूली, वैश्विक संकेतों और डॉलर की मजबूती के चलते कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अब लगातार उतार-चढ़ाव के बाद बाजार में कुछ स्थिरता दिखाई देने लगी है, जिससे निवेशकों की निगाहें फिर से इस सेक्टर पर टिक गई हैं।
जनवरी में बना था ऐतिहासिक रिकॉर्ड
29 जनवरी को Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के लाइफटाइम हाई पर पहुंच गई थी। वहीं सोना 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई पर दर्ज किया गया।
इन स्तरों ने बाजार में जबरदस्त उत्साह पैदा किया था। निवेशकों को उम्मीद थी कि यह तेजी आगे भी जारी रहेगी, लेकिन बाजार ने अचानक करवट ले ली।
रिकॉर्ड स्तर से कितनी आई गिरावट?
जनवरी के उच्चतम स्तर के बाद दोनों धातुओं में भारी गिरावट दर्ज की गई।
चांदी अपने लाइफटाइम हाई से लगभग 1,80,157 रुपये नीचे आ चुकी है और हाल में 2,35,206 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।
सोना भी अपने ऑल टाइम हाई से करीब 38,336 रुपये टूटकर 1,53,550 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट बताती है कि रिकॉर्ड तेजी के बाद बाजार में बड़ी मुनाफावसूली हुई।
दिल्ली सर्राफा बाजार में भी दिखा असर
राजधानी के सर्राफा बाजार में भी जनवरी के अंत में रिकॉर्ड स्तर दर्ज किए गए थे। 29 जनवरी 2026 को चांदी 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंची थी। सोना 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर दर्ज हुआ था।
हालांकि 16 फरवरी को चांदी 5,000 रुपये गिरकर 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई, जबकि सोना 700 रुपये की मामूली तेजी के साथ 1,59,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा। इसके बावजूद दोनों धातुएं अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे बनी हुई हैं।
गिरावट के पीछे क्या कारण रहे?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण रहे: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता, डॉलर इंडेक्स में मजबूती, बड़े निवेशकों की मुनाफावसूली, वैश्विक महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता इन सभी कारकों ने मिलकर कीमती धातुओं पर दबाव बनाया।
विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल बाजार संतुलन की ओर बढ़ रहा है। यदि वैश्विक आर्थिक संकेत सकारात्मक रहे और डॉलर में नरमी आई तो सोना-चांदी में फिर से तेजी लौट सकती है।
हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से प्रभावित हुए बिना दीर्घकालिक रणनीति के साथ निवेश करें। चरणबद्ध खरीदारी और जोखिम प्रबंधन इस समय बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
