Uttarakhand: …तो ऊधमसिंह नगर से कुमाऊं में हो रही गुटखा की अवैध सप्लाई, काशीपुर-रुद्रपुर में जमाखोरी का बड़ा नेटवर्क, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

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हल्द्वानी। गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर करीब 40 प्रतिशत जीएसटी बढ़ने के बाद उत्तराखंड में अवैध कारोबारियों की चांदी हो गई है। कीमतें बढ़ने का फायदा उठाते हुए कुछ कारोबारी जमाखोरी और कालाबाजारी का बड़ा खेल खेल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक राज्य के ऊधमसिंह नगर जिले में टैक्स चोरी कर बड़े पैमाने पर गुटखा और पान मसाला की खेप मंगाई जा रही है और फिर पूरे कुमाऊं में सप्लाई की जा रही है।

सूत्र बताते हैं कि जिले के काशीपुर में कई बड़े स्टॉकिस्ट सक्रिय हैं। यहां रोजाना दिल्ली और अन्य राज्यों से बंद बॉडी वाहनों में चोरी-छिपे भारी मात्रा में गुटखा और पान मसाला पहुंचाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन खेपों में टैक्स की खुली चोरी हो रही है। काशीपुर पहुंचने के बाद यही माल ट्रांसपोर्ट के जरिये हल्द्वानी समेत कुमाऊं के कई शहरों में खपाया जा रहा है।

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सूत्रों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में कुछ ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की भी अहम भूमिका है, जो रात के समय माल को अलग-अलग जिलों तक पहुंचाने का काम करते हैं। वहीं रुद्रपुर में भी कुछ कथित कारोबारी इस धंधे में शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके जरिए बड़ी मात्रा में माल की सप्लाई की जा रही है।

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एक स्थानीय कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे होने के कारण ऊधमसिंह नगर लंबे समय से टैक्स चोरी के लिए आसान रास्ता बना हुआ है। खासतौर पर किच्छा और रुद्रपुर के रास्ते ट्रांसपोर्ट वाहनों के जरिए बिना टैक्स का माल बड़ी आसानी से राज्य में पहुंच रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीमाओं पर कड़ी चेकिंग के दावों के बावजूद टैक्स चोरी के माल से लदे वाहन आखिर राज्य में प्रवेश कैसे कर रहे हैं। क्या चेकपोस्ट सिर्फ कागजों में ही सख्त हैं? या फिर इस पूरे खेल में कहीं न कहीं जिम्मेदार विभागों की अनदेखी या मिलीभगत है?

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इस मामले ने राज्य कर विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों के खिलाफ किए जा रहे जीरो टॉलरेंस के दावों के बीच इस तरह का संगठित अवैध कारोबार सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसेगा या फिर गुटखा-पान मसाला का यह काला कारोबार यूं ही चलता रहेगा।