Uttarakhand: सिस्टम बना मूकदर्शक, कुमाऊं में टैक्स चोरी का सिंडिकेट हावी…धामी सरकार के दावों पर सवाल

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हल्द्वानी/रुद्रपुर। उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के दावे भले ही लगातार किए जा रहे हों, लेकिन कुमाऊं मंडल में जमीनी हकीकत इन दावों को कटघरे में खड़ा करती नजर आ रही है। लंबे समय से चल रहे टैक्स चोरी के संगठित खेल पर न सरकार की सख्ती दिख रही है और न ही जिम्मेदार विभाग की कोई ठोस कार्रवाई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने की बात करते हैं, लेकिन कुमाऊं में टैक्स चोरी का नेटवर्क खुलेआम फल-फूल रहा है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि कहीं न कहीं सिस्टम की चुप्पी या मिलीभगत इस अवैध कारोबार को संरक्षण दे रही है।

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सूत्रों के मुताबिक, बरेली, दिल्ली, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश समेत कई शहरों से रोजाना बड़े ट्रकों के जरिए परचून, कपड़ा, जूते, कॉस्मेटिक्स और गुटखा जैसे सामान बिना टैक्स चुकाए उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सिलसिला लंबे समय से जारी है, लेकिन चेकिंग और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति नजर आती है।

कुमाऊं मंडल का रुद्रपुर, काशीपुर और किच्छा इस पूरे खेल के मुख्य केंद्र बन चुके हैं। बाहरी राज्यों से आने वाला माल सबसे पहले यहां के कथित ट्रांसपोर्टरों के पास उतारा जाता है। इसके बाद इसे छोटे वाहनों के जरिए हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट नगर, बरेली रोड और रामपुर रोड तक पहुंचाया जाता है, जहां से यह अवैध माल बाजारों और पहाड़ी क्षेत्रों में खपाया जाता है।

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सूत्र यह भी बताते हैं कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे विभाग के ही एक कथित अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है, जिसकी ट्रांसपोर्टरों से गहरी सांठगांठ बताई जा रही है। यही वजह है कि मामला बार-बार सुर्खियों में आने के बावजूद कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है और अवैध कारोबार बेखौफ जारी रहता है।

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इस स्थिति ने न सिर्फ सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस संगठित टैक्स चोरी के खेल पर कब तक चुप्पी साधे रहते हैं और कब सख्त कार्रवाई होती है।

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