वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच वैश्विक राजनीति में बयानबाज़ी और टकराव तेज हो गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO देशों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “कायर” तक कह दिया। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि NATO देशों ने परमाणु शक्ति संपन्न ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से परहेज किया। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि “अमेरिका के बिना NATO एक कागजी शेर है।” ट्रंप के मुताबिक, जब हालात गंभीर थे तब सहयोगी देश पीछे हट गए, लेकिन अब जब तेल की कीमतें बढ़ रही हैं तो वही देश शिकायत कर रहे हैं।
दरअसल, अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में गिना जाता है, ऐसे में यहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। ट्रंप ने कई देशों से इस जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए सैन्य मदद की अपील भी की थी, लेकिन अधिकांश देशों ने इससे दूरी बनाए रखी, जिससे अमेरिका कूटनीतिक रूप से अलग-थलग नजर आया।
इस पूरे संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत होने का दावा किया गया। इसके बाद नए नेतृत्व के तौर पर उभरे मोजतबा खामेनेई ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि ईरान इस हमले का बदला जरूर लेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की नीति जारी रखेगा।
इस बीच, अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय ने यहूदी और इज़राइली मूल के छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव को रोकने में गंभीर लापरवाही बरती। सरकार ने यहां तक कहा है कि यदि संस्थान भेदभाव रोकने में विफल रहते हैं तो उन्हें दी जाने वाली सरकारी फंडिंग वापस ली जानी चाहिए।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। तेल की बढ़ती कीमतें, समुद्री मार्गों की असुरक्षा और महाशक्तियों के बीच बढ़ता टकराव इस बात के संकेत हैं कि आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।
