कुमाऊं में टैक्स चोरी का ‘सिस्टम सेट’…छोटे कारोबारियों पर गाज, बड़े माफिया बेखौफ – कौन दे रहा संरक्षण?

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हल्द्वानी/रुद्रपुर: ऊधमसिंह नगर से लेकर हल्द्वानी तक टैक्स चोरी का खेल अब महज अवैध कारोबार नहीं, बल्कि एक संगठित और संरक्षित सिंडिकेट के रूप में सामने आ रहा है। लगातार हो रहे खुलासे इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि यह नेटवर्क सिस्टम की खामियों से नहीं, बल्कि कथित मिलीभगत से संचालित हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, विभाग के भीतर ही कुछ ऐसे ‘किरदार’ सक्रिय हैं, जो इस पूरे खेल को परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दे रहे हैं। यही वजह है कि कार्रवाई का डंडा सिर्फ छोटे कारोबारियों तक सीमित रहता है, जबकि बड़े कारोबारी जिन्हें इस खेल का असली ‘खिलाड़ी’ माना जा रहा है पूरी बेखौफी के साथ टैक्स चोरी को अंजाम दे रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इन बड़े नामों तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंचती?

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सरकार भले ही ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। टैक्स चोरी के इस संगठित खेल से सरकारी खजाने को रोजाना लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद बड़े स्तर पर न तो छापेमारी दिखती है और न ही किसी बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश।

ताजा खुलासे में गुटका (तंबाकू) सप्लाई के जरिए चल रहे काले कारोबार की परतें खुली हैं। सूत्रों के अनुसार, बाहरी राज्यों से बिना टैक्स के लाया जा रहा गुटका प्रति नग (कट्टा) 15 से 20 किलो का होता है, लेकिन उस पर करीब एक हजार रुपये तक का भारी-भरकम किराया वसूला जाता है। अलग-अलग ट्रकों के जरिए आने वाले इस माल में वजन भले कम हो, लेकिन अवैध कमाई का ग्राफ बेहद ऊंचा है।

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चौंकाने वाली बात यह है कि वैध बिल के साथ आने वाले माल का किराया बेहद कम होता है। ऐसे में ज्यादा मुनाफे की लालच में कारोबारी नियमों को खुलेआम धता बता रहे हैं। ट्रांसपोर्ट से लेकर गोदाम और सप्लाई तक एक पूरा ‘चेन सिस्टम’ इस खेल को मजबूती दे रहा है, जहां हर कड़ी का हिस्सा तय माना जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में कई बड़े नाम शामिल हैं, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई कर विभाग अपनी ‘एक्टिविटी’ दिखाने में जुटा है, जिससे यह पूरा मामला और संदिग्ध बनता जा रहा है। जल्द ही इस पूरे नेटवर्क के संरक्षणकर्ता के नाम का खुलासा किया जायेगा।

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कुमाऊं में टैक्स चोरी का यह खेल अब सिर्फ आर्थिक नुकसान का मुद्दा नहीं, बल्कि सिस्टम की साख और पारदर्शिता पर सीधा हमला बन चुका है। अगर जल्द ही बड़े खिलाड़ियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल और गूंजेगा क्या सिस्टम वाकई लाचार है या फिर पूरी तरह ‘सेट’?

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