RBI का ‘स्टेबल स्ट्राइक’: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, महंगाई काबू में, वैश्विक उथल-पुथल के बीच भरोसे का संकेत

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नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संतुलित रुख अपनाते हुए नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि रेपो रेट 5.25% पर यथावत रखा गया है। इस फैसले को बाजार में स्थिरता और भरोसे का मजबूत संकेत माना जा रहा है।

मौद्रिक नीति समिति मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भविष्य में हालात के अनुसार दरों में बदलाव की पूरी गुंजाइश बनी हुई है।

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गवर्नर मल्होत्रा ने अपने बयान में कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्ष और अस्थिरता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और उसकी रफ्तार बनी हुई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा वैश्विक माहौल में सतर्कता के साथ निर्णय लेना बेहद जरूरी है।

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इस नीति समीक्षा की सबसे अहम बात महंगाई को लेकर सामने आई। आरबीआई के अनुसार, हेडलाइन महंगाई दर 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है, जो न सिर्फ आम जनता के लिए राहत की खबर है, बल्कि व्यापार और निवेश के माहौल को भी मजबूती देती है। नियंत्रित महंगाई से बाजार में स्थिरता और उपभोक्ता मांग को समर्थन मिलता है।

वैश्विक स्तर पर जहां कई अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं, वहीं भारत के हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतक—जैसे खपत, उत्पादन और निवेश—लगातार मजबूती दिखा रहे हैं। इससे यह साफ है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां फिलहाल स्थिर और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

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हालांकि, आरबीआई ने यह भी माना कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य अभी भी अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। विभिन्न देशों के बीच चल रहे संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता का असर भविष्य में पड़ सकता है, इसलिए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाई है।

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