नई दिल्ली: देश की टैक्स प्रणाली में बड़े सुधार की दिशा में आयकर विभाग ने अहम कदम उठाते हुए ‘इनकम टैक्स रूल्स, 2026’ का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है। संसद से मंजूरी के बाद ये नए नियम वर्ष 1962 से लागू मौजूदा आयकर नियमों की जगह लेंगे। इसके साथ ही नया ‘इनकम टैक्स एक्ट, 2025’ आगामी 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने जा रहा है, जिसके तहत टैक्स नियमों और फॉर्म्स का पूरी तरह नया ढांचा तैयार किया गया है।
NEW INCOME TAX RULES 2026 DRAFT RELEASED FOR PUBLIC FEEDBACK: आयकर विभाग ने पारदर्शिता के तहत ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में रखते हुए टैक्सपेयर्स और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इच्छुक लोग 22 फरवरी, 2026 तक अपनी राय और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
टैक्स फॉर्म होंगे सरल और स्मार्ट
नए ड्राफ्ट में टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। नियमों की भाषा सरल की गई है और कैलकुलेशन को समझने के लिए फॉर्मूले व टेबल्स जोड़े गए हैं। पुराने, जटिल और दोहराव वाले प्रावधानों को हटाया गया है।
नए टैक्स फॉर्म्स को ‘स्मार्ट’ बनाया गया है, जिनमें प्री-फिल्ड डाटा, ऑटोमेटेड रिकंसिलिएशन जैसी सुविधाएं होंगी। इससे टैक्स भरने में लगने वाला समय घटेगा और गलतियों की संभावना भी कम होगी।
नियम 57: संपत्तियों की फेयर मार्केट वैल्यू तय करने का नया तरीका
ड्राफ्ट के अनुसार, नियम 57 के तहत अब संपत्तियों की फेयर मार्केट वैल्यू तय की जाएगी। पुराने नियम 11UA, 11UAA और 11UAB को मिलाकर एक ही नियम में समाहित कर दिया गया है।
ज्वैलरी: बाजार मूल्य या रजिस्टर्ड डीलर का इनवॉइस मान्य
पेंटिंग व कलाकृतियां: रजिस्टर्ड वैल्यूअर की रिपोर्ट अनिवार्य
जमीन व भवन: स्टांप ड्यूटी वैल्यू ही FMV मानी जाएगी
अन्य संपत्तियां: खुले बाजार की संभावित कीमत के आधार पर मूल्यांकन
नियम 6: होल्डिंग पीरियड को लेकर स्पष्टता
कैपिटल गेन टैक्स के लिए होल्डिंग पीरियड की गणना को लेकर भी नए नियमों में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं, जिससे टैक्स विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
आयकर विभाग का कहना है कि इन बदलावों से टैक्स सिस्टम अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनेगा और टैक्सपेयर्स को लंबे समय से चली आ रही जटिलताओं से बड़ी राहत मिलेगी।
