हल्द्वानी। उत्तराखंड में टैक्स चोरी पर सख्ती के दावे अब जमीन पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। एक ओर राज्य कर विभाग बड़ी कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुमाऊं मंडल में टैक्स चोरी का एक संगठित और बेखौफ नेटवर्क खुलकर खेल रहा है। हालात ऐसे हैं कि ऊधमसिंह नगर से लेकर पूरे कुमाऊं क्षेत्र में यह ‘सुपर सिंडिकेट’ सरकारी सिस्टम को खुली चुनौती देता दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश राज्य के विभिन्न शहरों से रोजाना उत्तराखंड बॉर्डर पार कर ट्रकों के जरिए बिना टैक्स का माल उत्तराखंड में प्रवेश कर रहा है। यह खेप रुद्रपुर, काशीपुर और किच्छा के रास्ते हल्द्वानी समेत पूरे कुमाऊं में सप्लाई की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब कुछ किसी छिपे हुए नेटवर्क के तहत नहीं, बल्कि खुलेआम ट्रांसपोर्ट के नाम पर हो रहा है और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
बताया जा रहा है कि यह खेल अब छोटे स्तर से निकलकर एक बड़े ‘सिंडिकेट मॉडल’ में तब्दील हो चुका है। परचून से लेकर कपड़ा, कॉस्मैटिक, जूते तक हर सेक्टर में बिना टैक्स का माल बाजार में खपाया जा रहा है। इतना ही नहीं, गुटका (तंबाकू) की खेप माल के नीचे दबाकर लाई जाती है। जिससे कथित ट्रांसपोर्ट एजेंट मोटा किराया वसूलते हैं। इससे न सिर्फ सरकार के राजस्व को रोजाना लाखों का नुकसान हो रहा है, बल्कि ईमानदार व्यापारियों के लिए भी यह सीधी मार साबित हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल सिस्टम की भूमिका को लेकर खड़ा हो रहा है। चर्चाएं हैं कि इस पूरे नेटवर्क को विभागीय स्तर पर ‘मौन सहमति’ मिली हुई है। यानी जिन अधिकारियों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी है, वही कथित तौर पर इस खेल के सामने बेबस या फिर ‘मिलीभगत’ के आरोपों में घिरे नजर आ रहे हैं।
कुछ समय पहले खबर कुमाऊं न्यूज पोर्टल ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सोशल मीडिया पर मामले को उठाया था, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक ठोस परिणाम सामने नहीं आए। नतीजा टैक्स चोरी करने वालों के हौसले और बुलंद हो गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल साफ है अगर सरकार सख्त है, तो फिर यह सिंडिकेट आखिर किसके भरोसे चल रहा है?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस ‘टैक्स माफिया’ के खिलाफ कब और कितनी बड़ी कार्रवाई करती है। क्योंकि अगर जल्द सख्ती नहीं हुई, तो यह नेटवर्क न सिर्फ और मजबूत होगा, बल्कि सरकारी खजाने को लगने वाला यह ‘रिसाव’ आने वाले समय में और बड़ा नुकसान बन सकता है।
