चीन में नोरोवायरस का कहर, एक ही स्कूल के 103 छात्र संक्रमित

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स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, स्कूल परिसर किया गया पूरी तरह से सैनिटाइज

नई दिल्ली। दक्षिणी चीन के गुआंग्डोंग प्रांत के फोशान शहर से स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। यहां स्थित शिंगहुई सीनियर हाई स्कूल के 103 छात्र नोरोवायरस से संक्रमित पाए गए हैं। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को इस संक्रमण की पुष्टि की। हालांकि राहत की बात यह है कि सभी संक्रमित छात्रों की हालत स्थिर बताई जा रही है और किसी भी छात्र की स्थिति गंभीर नहीं है, न ही किसी प्रकार की जनहानि की सूचना है।

Norovirus Outbreak in Guangdong School Triggers Health Watch
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बीते दिनों स्कूल के कई छात्र अचानक उल्टी और दस्त जैसी शिकायतों के साथ बीमार पड़े थे। जांच के बाद पुष्टि हुई कि ये सभी मामले नोरोवायरस संक्रमण से जुड़े हैं। इसके बाद तुरंत स्वास्थ्य विभाग और स्कूल प्रशासन हरकत में आया और एहतियाती कदम उठाए गए।

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सभी 103 संक्रमित छात्रों की सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है। स्कूल परिसर को पूरी तरह से कीटाणुरहित कर दिया गया है और छात्रों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। इसके साथ ही संक्रमण कहां से फैला और कैसे फैला, इसका पता लगाने के लिए एपिडेमियोलॉजिकल सर्वे भी शुरू कर दिया गया है।

गुआंग्डोंग प्रांत के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम विभाग (CDC) ने बताया कि इस क्षेत्र में हर साल अक्टूबर से मार्च के बीच नोरोवायरस का प्रकोप अधिक देखने को मिलता है। ठंड के मौसम में यह वायरस तेजी से फैलता है, खासकर स्कूलों, हॉस्टलों और सामूहिक रहने वाली जगहों में।

नोरोवायरस एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है, जो तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस यानी पेट से जुड़ी बीमारी का कारण बनता है। इसके लक्षणों में तेज उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी शामिल हैं। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति, दूषित भोजन, पानी या सतहों के संपर्क में आने से तेजी से फैलता है।

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वैश्विक स्तर पर नोरोवायरस को भोजन से फैलने वाली बीमारियों का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। अनुमान के मुताबिक हर साल दुनिया भर में लगभग 685 मिलियन नोरोवायरस के मामले सामने आते हैं, जिनमें से करीब 200 मिलियन मामले पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होते हैं।

आंकड़ों के अनुसार, नोरोवायरस संक्रमण के कारण हर साल करीब दो लाख लोगों की मौत होती है, जिनमें लगभग 50 हजार बच्चे शामिल हैं। इस बीमारी का असर सबसे ज्यादा गरीब और विकासशील देशों में देखा जाता है। इलाज, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक नुकसान को मिलाकर इससे होने वाला वैश्विक आर्थिक बोझ करीब 60 अरब डॉलर आंका गया है।

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इतिहास की बात करें तो नोरोवायरस का पहला बड़ा प्रकोप वर्ष 1968 में अमेरिका के नॉरवॉक शहर के एक स्कूल में सामने आया था। इसी वजह से शुरुआती दौर में इसे “नॉरवॉक वायरस” कहा गया। यह बीमारी पेट से जुड़ी होती है, जिसे आम बोलचाल में लोग अक्सर गलत तरीके से “पेट का फ्लू” कह देते हैं, जबकि असली फ्लू एक श्वसन रोग होता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भूमध्य रेखा के ऊपर स्थित देशों में नोरोवायरस का प्रकोप आमतौर पर नवंबर से अप्रैल के बीच ज्यादा रहता है, जबकि भूमध्य रेखा के नीचे वाले देशों में यह अप्रैल से सितंबर के बीच फैलता है। भूमध्य रेखा के आसपास स्थित क्षेत्रों में इसके फैलने का कोई निश्चित मौसम नहीं होता।