नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात पर गहरी चिंता जताई। इस दौरान उन्होंने अहम बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालती हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को भी प्रभावित करती हैं।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति को ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने उम्मीद जताई कि त्योहारों का यह समय पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आएगा।
वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने और शिपिंग रूट्स को सुरक्षित व खुला रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए इन मार्गों का सुचारु संचालन बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरानी सरकार के सहयोग की सराहना भी की। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बातचीत है। इससे पहले 12 मार्च को मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री मोदी को मौजूदा स्थिति की जानकारी दी थी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और शांति की दिशा में कदम उठाने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल सहित पड़ोसी क्षेत्रों को निशाना बनाया। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण सख्त कर दिया, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग है और जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति होती है।
संघर्ष के बाद से ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी रखी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा है।
इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय हालात को देखते हुए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस और मलेशिया सहित कई देशों के नेताओं से भी बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की है।
