श्रम, गृह, कारागार और वन विभाग से जुड़े अहम निर्णय; सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना 2025-26 तक जारी रहेगी
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में छह अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में श्रम विभाग, गृह विभाग, कारागार, वन विभाग और सूक्ष्म खाद्य उद्यम से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर हजारों कर्मचारियों और लाभार्थियों पर पड़ेगा।
Cabinet Clears 6 Key Proposals; Bonus Act 2020 Withdrawn: कैबिनेट ने श्रम विभाग से जुड़े पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 2020 को वापस लेने का फैसला किया। यह प्रस्ताव कोविड काल के दौरान लाया गया था, जिसमें उद्योगों को सरप्लस होने पर ही बोनस देने का प्रावधान किया गया था।
हालांकि, चूंकि केंद्र का पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 पहले से लागू है और राष्ट्रपति की मंजूरी भी नहीं मिल पाई थी, इसलिए राज्य सरकार ने 2020 का प्रस्ताव वापस लेने का निर्णय लिया। अब केंद्रीय कानून 1965 के तहत सभी पात्र कर्मचारियों को बोनस मिलेगा।
ESI सेवा नियमावली 2026 को मंजूरी, 94 पद सृजित
बैठक में उत्तराखंड एम्प्लॉयी स्टेट इंश्योरेंस सर्विस स्कीम 2026 को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत ESI में कुल 94 नए पद सृजित किए जाएंगे।
मेडिकल ऑफिसर – 76 पद
असिस्टेंट डायरेक्टर – 11 पद
लेवल-12 के 6 पद
एडिशनल डायरेक्टर (लेवल-13) – 1 पद
अब मेडिकल ऑफिसर स्तर पर सीधी भर्ती के साथ पदोन्नति की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मजबूती
गृह विभाग से जुड़े प्रस्ताव के तहत 2022 में गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को और सशक्त किया जाएगा। मुख्यालय स्तर पर 22 नए पद सृजित करने को मंजूरी दी गई है, जिसमें एक पुलिस उपाधीक्षक सहित अन्य पद शामिल हैं। इससे नशे के खिलाफ अभियान को गति मिलने की उम्मीद है।
‘आदतन अपराधी’ की परिभाषा में बदलाव
कैबिनेट ने 2024 में पारित उत्तराखंड कारागार एक्ट में संशोधन का निर्णय लिया। अब आदतन अपराधियों को पूर्व के अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार परिभाषित किया जाएगा। इस फैसले से जेल प्रशासन की प्रक्रिया में बदलाव आएगा।
वन विभाग के 589 दैनिक श्रमिकों को राहत
वन विभाग में कार्यरत 893 दैनिक श्रमिकों में से शेष 589 श्रमिकों को भी न्यूनतम वेतनमान देने का निर्णय लिया गया है। इससे लंबे समय से वेतन विसंगति झेल रहे श्रमिकों को राहत मिलेगी।
सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना 2025-26 तक जारी
कैबिनेट ने तय किया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के साथ संचालित मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना भी 2025-26 तक जारी रहेगी। इससे प्रदेश के सूक्ष्म उद्यमियों को वित्तीय और तकनीकी सहायता मिलती रहेगी।
