अमेरिकी हमलों की आशंका के बीच ईरान-रूस का संयुक्त युद्धाभ्यास, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

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काहिरा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और रूस ने ओमान की खाड़ी और उत्तरी हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। अमेरिकी सैन्य तैयारियों और संभावित हमलों की आशंकाओं के बीच यह ड्रिल सामरिक दृष्टि से अहम मानी जा रही है।

ओमान की खाड़ी में ज्वाइंट ड्रिल, हाईजैक जहाज छुड़ाने का अभ्यास
ईरानी सेना की वेबसाइट के हवाले से न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि ईरान की नियमित सेना, Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) और रूस की स्पेशल ऑपरेशन टीमों ने संयुक्त अभ्यास के दौरान एक हाईजैक किए गए जहाज को छुड़ाने का ऑपरेशन किया।

रिपोर्ट के अनुसार, इस अभ्यास में ईरान का अलवंद डिस्ट्रॉयर, मिसाइल दागने में सक्षम युद्धपोत, हेलीकॉप्टर, लैंडिंग क्राफ्ट, स्पेशल ऑपरेशन यूनिट्स और कॉम्बैट स्पीडबोट शामिल रहीं। यह ड्रिल हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में आईआरजीसी द्वारा किए गए अभ्यास के बाद हुई है, जिसमें रणनीतिक जलमार्ग को कुछ समय के लिए बंद किया गया था।

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ट्रंप की चेतावनी: “10 से 15 दिन में डील करें”
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने गुरुवार को कहा कि ईरान के पास अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता करने के लिए 10 से 15 दिन का समय है। उन्होंने चेतावनी दी कि समयसीमा पार होने पर “बहुत बुरी चीजें” हो सकती हैं। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि यह काफी समय होगा।”

पिछले सप्ताह ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford को मिडिल ईस्ट में तैनात करने का आदेश दिया। इससे पहले से मौजूद USS Abraham Lincoln और उसके साथ तैनात गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर की ताकत और बढ़ गई है।

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अमेरिकी सैन्य तैयारी तेज, हमले की अटकलें
हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वायु और नौसैनिक शक्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना संभावित हमले के लिए तैयार है।

यूएस न्यूज आउटलेट एक्सियोस ने दावा किया है कि यदि ईरान के साथ परमाणु वार्ता विफल होती है तो कुछ हफ्तों के भीतर हमले की 90 प्रतिशत तक संभावना हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन कई हफ्तों तक चल सकता है और इसमें अमेरिका, इजरायल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को निशाना बना सकता है।

सीमित हमले पर भी विचार
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन शुरुआती चरण में सीमित सैन्य हमले पर विचार कर रहा है, ताकि ईरान को परमाणु समझौते से जुड़ी शर्तें मानने के लिए दबाव में लाया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, मंजूरी मिलने की स्थिति में कुछ ही दिनों में सैन्य और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।

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क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक हलचल
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान-रूस का यह संयुक्त युद्धाभ्यास एक स्पष्ट संदेश है कि तेहरान संभावित अमेरिकी दबाव का मुकाबला करने के लिए रणनीतिक साझेदारों के साथ खड़ा है। वहीं अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती से मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल दुनिया की निगाहें अमेरिका-ईरान वार्ता और आने वाले दिनों की कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हैं, क्योंकि किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।