तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपने संवेदनशील परमाणु और मिसाइल ठिकानों को तेजी से मजबूत करना शुरू कर दिया है। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में कई सैन्य परिसरों में कंक्रीट संरचनाएं, मिट्टी से बंद किए गए सुरंग द्वार और क्षतिग्रस्त इमारतों की मरम्मत के स्पष्ट संकेत मिले हैं। रक्षा विशेषज्ञ इसे संभावित हवाई हमलों से सुरक्षा बढ़ाने की रणनीति मान रहे हैं।
पारचिन में ‘कंक्रीट सरकोफेगस’ से बढ़ी चिंता
तेहरान से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व स्थित पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय निगरानी में है। पश्चिमी एजेंसियों का दावा रहा है कि यहां अतीत में परमाणु हथियारों से जुड़े उच्च-विस्फोटक परीक्षण किए गए थे। अक्टूबर 2024 में इजराइल के हमले के बाद क्षतिग्रस्त हुई एक बड़ी आयताकार इमारत को अब पूरी तरह नए सिरे से तैयार किया गया है।
नवंबर 2024 की तस्वीरों में पुनर्निर्माण शुरू होता दिखा।
अक्टूबर 2025 तक नई संरचना का ढांचा और आसपास दो छोटी इमारतें तैयार हो गईं। फरवरी 2026 की ताजा तस्वीरों में पूरी इमारत कंक्रीट की मोटी ढाल और मिट्टी से ढकी नजर आई।
अमेरिका स्थित निगरानी संस्था इंस्टिट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि यहां लगभग 36 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा बेलनाकार चैम्बर बनाया गया है, जो उच्च-विस्फोटक परीक्षण से जुड़ा हो सकता है। हालांकि ईरान लगातार परमाणु हथियार विकसित करने के आरोपों से इनकार करता रहा है।
इस्फहान में सुरंगों के मुहाने बंद
ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों में शामिल इस्फहान परमाणु परिसर में भी बड़े बदलाव देखे गए हैं। जनवरी के अंत में ली गई तस्वीरों में दो भूमिगत सुरंगों के प्रवेश द्वार मिट्टी से बंद किए गए, जबकि फरवरी तक तीसरे द्वार को भी सील कर दिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कदम हवाई हमले की स्थिति में भूमिगत भंडारण और उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए उठाए जाते हैं।
नतांज के पास ‘पिकैक्स माउंटेन’ में हलचल
नतांज परमाणु सुविधा के पास पहाड़ के नीचे बने सुरंग परिसर में भी निर्माण गतिविधियां तेज हैं। डंप ट्रक, सीमेंट मिक्सर और भारी मशीनों की आवाजाही दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह भूमिगत संरचना संवेदनशील गतिविधियों को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम हो सकता है।
मिसाइल बेस की मरम्मत, बढ़ाई जा रही क्षमता
शिराज साउथ मिसाइल बेस
दक्षिणी ईरान में स्थित यह अड्डा मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए अहम माना जाता है। पिछले संघर्ष में हुए नुकसान के बाद यहां मरम्मत और सफाई का काम तेज किया गया है। हालांकि, अभी पूरी परिचालन क्षमता बहाल नहीं हुई है।
कोम मिसाइल बेस
कोम शहर के उत्तर स्थित इस बेस पर क्षतिग्रस्त इमारतों पर नई छत डाली गई है। मरम्मत कार्य लगभग 10 दिनों में पूरा हुआ, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान अपनी मिसाइल क्षमताओं को जल्द से जल्द पुनर्स्थापित करना चाहता है।
परमाणु वार्ता के बीच सैन्य तैयारी
इन गतिविधियों का समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन वॉशिंगटन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वार्ता विफल होने पर सैन्य विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
ऐसे में ईरान द्वारा भूमिगत संरचनाओं को मजबूत करना और मिसाइल अड्डों की मरम्मत करना यह संकेत देता है कि वह किसी भी संभावित हमले के लिए तैयार रहना चाहता है।
