ईरान हिंसक प्रदर्शनों में 5000 से ज्यादा मौतों का दावा, 1979 की क्रांति के बाद सबसे घातक हिंसा

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तेहरान: ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में फैली हिंसा में अब तक कम से कम 5000 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में करीब 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं। सरकार ने इन घटनाओं के लिए आतंकवादी तत्वों और हथियारबंद दंगाइयों को जिम्मेदार ठहराया है, जिन पर आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है।

Violent Protests Shake Iran: ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह प्रदर्शन 28 दिसंबर को आर्थिक बदहाली, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में शुरू हुए थे। शुरुआत में आंदोलन शांतिपूर्ण था और लोग रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरे थे, लेकिन महज दो हफ्तों में हालात तेजी से बिगड़ गए। कई शहरों में सरकार विरोधी नारे लगे और धार्मिक शासन को खत्म करने की मांग तेज हो गई।

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सरकार का दावा है कि अब तक सामने आए मौत के आंकड़े पूरी तरह सत्यापित हैं और अंतिम संख्या में बहुत अधिक बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। प्रशासन के मुताबिक, कई इलाकों में हिंसा इस हद तक बढ़ गई कि हालात काबू से बाहर हो गए, जिसके चलते सुरक्षाबलों को सख्त कदम उठाने पड़े।

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ईरानी नेतृत्व लगातार इस अशांति के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहरा रहा है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने आरोप लगाया है कि इन प्रदर्शनों के पीछे United States और Israel का हाथ है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हिंसा में हजारों लोगों की जान गई है। सरकार का कहना है कि बाहरी शक्तियों ने देश के भीतर मौजूद असंतोष का फायदा उठाकर हालात को और भड़काया।

ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, यह हिंसा 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद देश की सबसे घातक घटनाओं में से एक मानी जा रही है। तब से अब तक कई बार बड़े विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मौतें पहले कभी नहीं हुईं। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

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सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में शांति बहाल करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी है और सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि हालात और न बिगड़ें।