सिंधु के बाद अब रावी का भी पानी रोकेगा भारत, पाकिस्तान को लग सकता है बड़ा झटका

खबर शेयर करें

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच जल कूटनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद केंद्र सरकार अब रावी नदी के भारत के हिस्से के पानी का पूरा उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर बन रहा शाहपुर कंडी बांध अब अंतिम चरण में है। इसके पूरा होते ही रावी का अतिरिक्त जल पाकिस्तान की ओर बहने के बजाय भारत के भीतर ही रोका और उपयोग किया जा सकेगा।

31 मार्च तक पूरा हो सकता है निर्माण
जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री जावेद अहमद राना ने संकेत दिए हैं कि 31 मार्च तक परियोजना का काम पूरा हो सकता है। उनके अनुसार, बांध से रावी के अतिरिक्त जल को जम्मू क्षेत्र के कठुआ और सांबा जैसे सूखाग्रस्त जिलों की ओर मोड़ा जाएगा।

यह भी पढ़ें 👉  भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को रफ्तार: डीएलआई स्कीम के तहत 24 नए चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

यह परियोजना विशेष रूप से कंडी क्षेत्र की सिंचाई जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जहां लंबे समय से पानी की कमी एक बड़ी चुनौती रही है।

सूखे इलाकों को मिलेगा संजीवनी
बांध के जरिए पंजाब में करीब 5000 हेक्टेयर भूमि, जम्मू क्षेत्र के कठुआ और सांबा जिलों में 32 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई संभव होगी। इससे सीमावर्ती किसानों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

चार दशक पुरानी परियोजना, अब मिली रफ्तार
शाहपुर कंडी परियोजना की परिकल्पना 1979 में की गई थी और 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसकी आधारशिला रखी थी।

यह भी पढ़ें 👉  12 घंटे में 1057 पुरुषों संग संबंध का दावा करने वाली बॉनी ब्लू बाली से डिपोर्ट, 10 साल का प्रतिबंध

हालांकि पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद के कारण यह परियोजना लंबे समय तक अटकी रही। वर्ष 2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आई।

3394 करोड़ की लागत, केंद्र और पंजाब का साझा निवेश
करीब 3394 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस बांध में पंजाब सरकार ने लगभग 2694 करोड़ रुपये, केंद्र सरकार ने करीब 700 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। बांध की ऊंचाई करीब 55 मीटर और लंबाई 7.7 किलोमीटर है, जिससे जल संग्रहण और वितरण की क्षमता काफी बढ़ जाएगी।

क्या कहती है कानूनी स्थिति?
पूर्व सिंचाई मंत्री ताज मोहिदीन का कहना है कि सिंधु जल संधि बांध के संचालन को सीमित नहीं करती, क्योंकि रावी नदी के जल पर भारत का अधिकार है।

यह भी पढ़ें 👉  लोकसभा में VB-G RAM G विधेयक-2025 पेश, हर साल 125 दिन रोजगार की गारंटी...95 हजार करोड़ से अधिक खर्च करेगी केंद्र सरकार

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परियोजना जहां एक ओर सीमावर्ती राज्यों में कृषि उत्पादन और जल प्रबंधन को मजबूती देगी, वहीं दूसरी ओर भारत-पाक जल संबंधों पर भी दूरगामी असर डाल सकती है।

आने वाले महीनों में क्या बदलेगा समीकरण?
यदि शाहपुर कंडी बांध पूरी क्षमता से संचालित होता है तो भारत अपने हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग कर पाएगा। इससे पाकिस्तान में जल उपलब्धता पर असर पड़ सकता है, खासकर गर्मियों के दौरान। रावी पर यह कदम केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।