श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के रेल इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने वाला है। जम्मू से श्रीनगर तक सीधी वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। फिलहाल यह ट्रेन श्री माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन से श्रीनगर तक संचालित हो रही है, लेकिन जल्द ही इसे जम्मू तवी तक विस्तारित किया जा सकता है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, जम्मू तवी रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म विस्तार, यात्री सुविधाओं के उन्नयन और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। निर्माण कार्य के चलते सेवा विस्तार में थोड़ी देरी हुई थी, लेकिन अब ट्रायल और अंतिम निरीक्षण के बाद जल्द ही हरी झंडी मिलने की संभावना है।
सफर आधा, आराम दोगुना
वंदे भारत ट्रेन के संचालन से कटरा से श्रीनगर का सफर अब करीब तीन घंटे से थोड़ा अधिक समय में पूरा हो रहा है। वहीं, सड़क मार्ग से यही दूरी तय करने में 6 से 7 घंटे या उससे भी अधिक समय लग जाता है, खासकर खराब मौसम या ट्रैफिक के दौरान।
जम्मू से सीधे श्रीनगर कनेक्टिविटी शुरू होने के बाद यात्रियों को बिना ट्रेन बदले घाटी तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की बचत होगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘नई पीढ़ी’ की ट्रेन
वंदे भारत एक्सप्रेस देश की अर्ध-उच्च गति वाली आधुनिक ट्रेनों में शामिल है। इसमें यात्रियों को मिलती हैं आरामदायक एवं रीक्लाइनिंग सीटें, पूर्ण वातानुकूलित डिब्बे, ऑनबोर्ड इंटरनेट सुविधा, बेहतर खानपान व्यवस्था, उन्नत सुरक्षा प्रणाली
सीसीटीवी निगरानी और स्वचालित दरवाजे, इन सुविधाओं के चलते यह ट्रेन यात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है।
बढ़ती मांग, डिब्बों की संख्या बढ़ाने की तैयारी
कटरा-श्रीनगर मार्ग पर वंदे भारत की मांग लगातार बढ़ रही है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के बावजूद ट्रेन का नियमित संचालन यात्रियों के लिए राहत साबित हुआ। रेलवे अब डिब्बों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
फिलहाल ट्रेन में 8 कोच हैं, जिन्हें भविष्य में बढ़ाकर 20 कोच तक किया जा सकता है, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को सुविधा मिल सके।
पर्यटन और व्यापार को मिलेगा नया संबल
जम्मू से सीधे श्रीनगर तक ट्रेन सेवा शुरू होने से कश्मीर घाटी में पर्यटन को नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालु, पर्यटक और कारोबारी—सभी को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि सेवा अगले सप्ताह या उससे पहले भी शुरू की जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो जम्मू-कश्मीर के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
