Uttarakhand: 4.75 करोड़ का फर्जी आईटीसी घोटाला…7 फर्मों पर छापे, ‘जीरो टॉलरेंस’ पर उठे सवाल

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ई-वे बिल से टोल डाटा तक की पड़ताल में खुला खेल, 1.10 करोड़ तत्काल जमा

देहरादून। उत्तराखंड में जीएसटी चोरी पर लगाम कसने के दावों के बीच एक और बड़ा मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की केंद्रीयकृत आसूचना इकाई (सीआईयू) ने वर्क कॉन्ट्रैक्ट और आईटी सेक्टर से जुड़ी 7 फर्मों पर छापेमारी कर करीब 4.75 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले का खुलासा किया है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने सरकार की निगरानी व्यवस्था और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

Digital Red Flags Ignored?: सीआईयू ने जीएसटी पोर्टल और ई-वे बिल डाटा का विश्लेषण किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिन वाहनों के नाम पर ई-वे बिल जारी हुए, वे संबंधित तारीखों में किसी भी टोल प्लाजा से गुजरे ही नहीं। यानी कागजों में माल की सप्लाई दिखाई गई, जबकि जमीनी स्तर पर उसका कोई रिकॉर्ड नहीं था। विशेषज्ञों का कहना है कि ई-वे बिल और टोल डाटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन पहले ही किया जाता तो करोड़ों की संभावित राजस्व हानि रोकी जा सकती थी।

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घोषित पते पर नहीं मिलीं फर्में

जांच के दौरान कई फर्में अपने घोषित पते पर संचालित नहीं मिलीं। कई आपूर्तिकर्ताओं का खरीद बैकअप भी उपलब्ध नहीं था, जो फर्जी सप्लाई चेन की ओर इशारा करता है। इससे संकेत मिलता है कि बिलिंग का नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और लंबे समय से सक्रिय हो सकता है।

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छापेमारी में दस्तावेज जब्त, 1.10 करोड़ की वसूली

कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। संबंधित फर्मों ने छापेमारी के दौरान ही 1.10 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में जमा कराए। विभाग के अनुसार बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।

10 टीमों का संयुक्त ऑपरेशन

इस व्यापक अभियान में 10 टीमों के 22 अधिकारी शामिल रहे। टीम में उपायुक्त विनय पांडेय, निखिलेश श्रीवास्तव, विनय ओझा, योगेश मिश्रा, सहायक आयुक्त के. पांडेय, धर्मेंद्र कुमार, नीतिका नारंग, गार्गी बहुगुणा तथा सीटीओ शैलेंद्र चमोली, गजेंद्र भंडारी, हेमा नेगी, मनोज और रजत कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।

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सवाल बरकरार

हालांकि विभाग ने इसे बड़ी कार्रवाई बताया है, लेकिन यह भी सच है कि जब डिजिटल सिस्टम और डेटा एनालिटिक्स उपलब्ध हैं, तब करोड़ों की टैक्स चोरी का मामला सामने आना प्रशासनिक सतर्कता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच के बाद क्या सिर्फ वसूली होगी या जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।