यमुना एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा: कंटेनर ने 15 लोगों को रौंदा, 6 की दर्दनाक मौत

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बस सड़क किनारे खड़ी थी, ग्रीन जोन नियमों की अनदेखी बनी हादसे की वजह?

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में शनिवार तड़के यमुना एक्सप्रेस-वे पर एक भीषण सड़क हादसे ने छह जिंदगियां छीन लीं, जबकि नौ लोग घायल हो गए। हादसा सुरीर थाना क्षेत्र में माइल स्टोन 88 के पास हुआ, जहां कुछ ही सेकंड में खुशहाल सफर चीख-पुकार में बदल गया।

Tragic Accident on Yamuna Expressway: 6 Dead, 9 Injured

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली से कानपुर जा रही एक बस को चालक ने निर्धारित ‘ग्रीन जोन’ में रोकने के बजाय सड़क किनारे ही खड़ा कर दिया। बस के कुछ यात्री लघुशंका के लिए नीचे उतरे थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आ रहा कंटेनर बस से टकरा गया और फिर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े यात्रियों को कुचलते हुए आगे बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई लोग उछलकर दूर जा गिरे।

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इनकी गई जान

हादसे में सोनू (औरैया), देवेश (बस्ती), अस्लम (कन्नौज), संतोष (दिल्ली) समेत छह लोगों की मौत हो गई। दो अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

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राहत-बचाव में जुटी पुलिस, यातायात रहा बाधित

सूचना मिलते ही पुलिस और एक्सप्रेस-वे की आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे के बाद कुछ समय के लिए एक्सप्रेस-वे पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे बाद में सुचारू कर दिया गया। कंटेनर चालक की तलाश जारी है।

प्रारंभिक जांच में लापरवाही की आशंका

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि बस को असुरक्षित स्थान पर खड़ा करना हादसे का प्रमुख कारण हो सकता है। एक्सप्रेस-वे पर वाहनों को केवल निर्धारित ‘ग्रीन जोन’ में रोकने के स्पष्ट निर्देश हैं। नियमों की अनदेखी ने यह भयावह परिणाम सामने ला दिया।

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सीएम ने जताया शोक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

यमुना एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार और लापरवाही एक बार फिर जानलेवा साबित हुई है। सवाल यही है—क्या नियमों का पालन सख्ती से होता तो छह लोगों की जान बचाई जा सकती थी?