वाशिंगटन/काराकस। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने विवादित बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। वेनेजुएला को लेकर अमेरिकी कार्रवाई के बीच ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर खुद को वेनेजुएला का ‘कार्यवाहक राष्ट्रपति (Acting President of Venezuela)’ बताते हुए ऐसा दावा किया है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप की यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
Now Trump calls himself ‘Acting President of Venezuela’: इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की थी। इस दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस के साथ हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क ले जाने का दावा किया गया, जहां उन पर नार्को-टेररिज्म से जुड़ी साजिश के गंभीर आरोप लगाए गए। इस कार्रवाई के बाद से ही वेनेजुएला की सत्ता और संप्रभुता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ट्रंप ने बयान दिया था कि अमेरिका वेनेजुएला की जिम्मेदारी तब तक संभालेगा, जब तक वहां “सुरक्षित, सही और समझदारी भरा सत्ता परिवर्तन” नहीं हो जाता। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका यह जोखिम नहीं उठा सकता कि कोई ऐसा पक्ष वेनेजुएला पर नियंत्रण करे, जो वहां की जनता के हितों के खिलाफ हो।
इस बीच वेनेजुएला में सत्ता की बागडोर उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री डेल्सी रोड्रिगेज को सौंपी गई, जिन्होंने पिछले सप्ताह देश की अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में औपचारिक शपथ ली। इसके तुरंत बाद ट्रंप ने दावा किया कि अंतरिम प्रशासन की ओर से अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल उच्च गुणवत्ता वाला स्वीकृत तेल बाजार भाव पर उपलब्ध कराया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला पर दबाव बना रहा है कि वह चीन, रूस, ईरान और क्यूबा के साथ अपने आर्थिक संबंध समाप्त करे। इसके बदले में ही उसे अधिक तेल उत्पादन की अनुमति दिए जाने की बात कही जा रही है। अमेरिकी प्रशासन की मंशा है कि वेनेजुएला तेल उत्पादन के क्षेत्र में केवल अमेरिका के साथ साझेदारी करे और कच्चा तेल बेचते समय अमेरिका को प्राथमिकता दे।
फिलहाल ट्रंप का खुद को ‘कार्यवाहक राष्ट्रपति’ बताना केवल एक सोशल मीडिया दावा माना जा रहा है, जिसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय या संवैधानिक मान्यता का समर्थन नहीं मिला है। बावजूद इसके, यह मामला अंतरराष्ट्रीय राजनीति, संप्रभुता और शक्ति संतुलन के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े कर रहा है और आने वाले दिनों में इस पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
