तेहरान/वॉशिंगटन। इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद मध्य-पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। शनिवार दोपहर Iran ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कम से कम आठ देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों की जद में बहरीन, कतर, यूएई, सऊदी अरब, इजरायल, कुवैत और दुबई जैसे रणनीतिक क्षेत्र बताए जा रहे हैं।
बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े पर मिसाइल हमला
बहरीन सरकार ने पुष्टि की है कि वहां स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय को मिसाइलों से निशाना बनाया गया। यह बेड़ा United States Navy Fifth Fleet के नाम से जाना जाता है और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का प्रमुख केंद्र है। हमले के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
खाड़ी देशों में धमाकों की गूंज
Qatar की राजधानी दोहा में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक Abu Dhabi और Dubai में भी विस्फोटों की गूंज महसूस की गई। शुरुआती रिपोर्टों में बड़े पैमाने पर नुकसान या हताहतों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
ईरान ने दावा किया है कि उसने “सटीक मार करने वाली और अत्याधुनिक मिसाइलों” से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। मध्य-पूर्व के कई देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं, जहां बड़ी संख्या में सैनिक, फाइटर जेट और उन्नत हथियार तैनात हैं।

पहले अमेरिका-इजरायल का हमला
इससे पहले शनिवार को अमेरिका और Israel ने ईरान के कई ठिकानों पर व्यापक हमला किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक वीडियो संदेश जारी कर ईरानी नागरिकों से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील की थी।
रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती हमलों में तेहरान के डाउनटाउन क्षेत्र में स्थित ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के आवासीय परिसर को भी निशाना बनाया गया। हालांकि उस समय उनके वहां मौजूद होने की पुष्टि नहीं हो सकी। हमलों के बाद राजधानी तेहरान से धुएं के गुबार उठते देखे गए।
आईआरजीसी ने संभाली मोर्चेबंदी
ईरान की पैरामिलिट्री फोर्स Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) ने बयान जारी कर कहा कि उसने इजरायल की दिशा में ड्रोन और मिसाइलों की पहली लहर दागकर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस बीच यमन में ईरान समर्थित Houthi movement ने भी रेड सी शिपिंग रूट और इजरायल के खिलाफ हमले दोबारा शुरू करने की चेतावनी दी है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
परमाणु कार्यक्रम बना टकराव की जड़
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने पहले ही क्षेत्र में लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की व्यापक तैनाती कर दी थी। उनका दावा है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।
तेजी से बदलते हालात के बीच पूरे मध्य-पूर्व में अस्थिरता की आशंका गहरा गई है। वैश्विक बाजारों और तेल आपूर्ति पर भी इस टकराव का सीधा असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है।
