‘अप्रकाशित’ किताब पर सियासी संग्राम, जनरल नरवणे मामले में राहुल गांधी का बड़ा सवाल

खबर शेयर करें

नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे (सेवानिवृत्त) की कथित ‘अप्रकाशित’ किताब के सर्कुलेशन को लेकर दर्ज एफआईआर ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए प्रकाशक और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मीडिया के सामने जनरल नरवणे का एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट साझा कर पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है।

Book Row Triggers Political Firestorm, Rahul Gandhi Seeks Clarity: राहुल गांधी ने कहा कि जनरल नरवणे ने अपने एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट में स्वयं लिखा था कि उनकी किताब उपलब्ध है और उसे खरीदने के लिए लिंक भी साझा किया गया था। ऐसे में यह दावा करना कि किताब प्रकाशित ही नहीं हुई, कई शंकाएं पैदा करता है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड: शादी समारोह में जा रहा परिवार हादसे का शिकार, कार नदी में समाई, एक महिला रेस्क्यू, चार लापता

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किताब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थी या उसके प्रचार से जुड़े पोस्ट मौजूद हैं, तो फिर उसे ‘अनपब्लिश्ड’ बताकर एफआईआर दर्ज करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? राहुल गांधी ने जांच एजेंसियों से इस पर स्पष्ट स्थिति बताने की मांग की।

कांग्रेस नेता ने कहा, “या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं या फिर प्रकाशक गलत बयान दे रहा है। मुझे नहीं लगता कि देश के पूर्व आर्मी चीफ झूठ बोलेंगे।

यह भी पढ़ें 👉  ईरान पर अमेरिका का बड़ा हवाई हमला, खार्ग द्वीप के सैन्य ठिकाने तबाह करने का ट्रंप का दावा

उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि आखिर सच्चाई क्या है—किताब प्रकाशित हुई थी या नहीं, और यदि नहीं हुई तो उसका लिंक और प्रचार कैसे सामने आया?

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संभव है किताब में ऐसे मुद्दों का जिक्र हो, जो केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असहज हों। उन्होंने कहा कि इसी वजह से पूरे मामले को विवादित बनाया जा रहा है।

उनका कहना था कि यदि कोई पूर्व सेना प्रमुख अपने अनुभवों पर आधारित पुस्तक लिखता है, तो उसे पारदर्शिता के साथ सामने आना चाहिए, न कि उसे लेकर भ्रम की स्थिति पैदा की जाए।

यह भी पढ़ें 👉  सुकमा में नक्सलियों को बड़ा झटका: 26 माओवादियों ने किया सरेंडर, 13 पर था 65 लाख का इनाम

गौरतलब है कि जनरल एम.एम. नरवणे की कथित अप्रकाशित किताब के सर्कुलेशन को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है और जांच जारी है। हालांकि अब तक जांच एजेंसियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पारदर्शिता का मुद्दा बता रहा है, जबकि सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

You cannot copy content of this page